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साइबर ठग मनी लॉडिंग में फंसाने और आधार, पैन व मोबाइल नंबर बताकर देते हैं ठगी की वारदात को अंजाम, पुलिस कर रही बुजुर्गों को जागरूक

अलवर. तकनीकी के बदलते दौर में अब साइबर ठग नए— नए तरीके अपनाकर साइबर फ्रॉड का अंजाम दे रहे हैं। मेवात में नकली सोने की ईंटों से शुरू हुआ ठगी का यह दौर अब डिजिटल अरेस्ट तक पहुंच चुका है, जिससे साइबर ठग दूरदराज बैठे लोगो को केन्द्रीय जांच एजेंसी के फर्जी अ​धिकारी बन लोगों को डरा धमकाकर कई घंटों तक डिजिटल कैद में रख झूंठे मामले में लिप्त बता मोटी रकम अपने खातों में टांसफर करा ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पिछले दिनों ही अलवर के शहर कोतवाली क्षेत्र में घर पर अकेली महिला को डिजिटल अरेस्ट कर करीब एक करोड़ रुपयों की ठगी कर ली। इस घटना से सबक लेकर अलवर पुलिस ने अब जिले में बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट व साइबर फ्रॉड से जागरूक करने का अभियान शुरू किया है। पुलिस अब तक अलवर शहर में अभियान के तहत करीब 500 बुजुर्गों को इस बारे में समझाइश कर चुकी है। वहीं पुलिस अधिकारी बैंक अधिकारियों से समन्वय कर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के प्रयास में जुटे हैं।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि अलवर जिले में साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए पुलिस की ओर से अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में अब अलवर पुलिस की ओर से लगातार बच्चों से लेकर युवाओं तक समझाइश की जा रही है। वहीं पिछले दिनों बुजुर्ग के साथ हुई घटना को देखते हुए पुलिस ने अभियान शुरू कर बुजुर्ग व्यक्तियों को डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं से बचने के लिए जागरूक किया है। उन्होंने बताया कि यह अभियान पूरे जिले में संचालित किया जा रहा है, वहीं अलवर शहर में विभिन्न थाना क्षेत्रों में करीब 500 बुजुर्गों को साइबर अपराध व डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं से बचने के लिए जागरूक किया गया है।

कांस्टेबल अपनी बीटों में कर रहे बुजुर्गों को जागरूक

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कांबले ने बताया कि पुलिस की ओर से यह अभियान दो चरणों में लागू किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में जिले के हर थाना क्षेत्र के बीट कांस्टेबल अपने इलाके में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की पहचान करेंगे और क्षेत्र में स्थित मंदिर, पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर बुजुर्गों से संपर्क करेंगे। इसके बाद बीट कांस्टेबल अपने क्षेत्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सूची तैयार कर बीट उन्हें डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के तरीकों के बारे में बताएंगे और उन्हें ठगों के झांसे में नहीं आने के लिए जागरूक करेंगे।

ठग ऐसे देते हैं डिजिटल अरेस्ट की घटना को अंजाम

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ऐसी घटनाओं में साइबर ठग वीडियो कॉल कर खुद को पुलिस, सीबीआई, एनआइए, कस्टम अधिकारी या केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों झूठे केस में फंसाने के नाम पर डराते हैं और झूठे दस्तावेज बताकर उनकी झूठे मामलों में संलिप्तता बताते हैं, यह देखकर व्यक्ति डर जाता है। बाद में ठग डरे हुए लोगों को ऐसे मामलों से बाहर निकालने के नाम पर अपने खातों में मोटी रकम डलवाते हैं। साइबर ठग कई बार लोगों को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखते हैं, ​जिससे डरकर व्यक्ति ठगों के कहे अनुसार उनके बैंक खातों में मोटी रकम डाल देते हैं और मामला जब तक पुलिस तक पहुंचता है, तब तक व्यक्ति के साथ बड़ी ठगी हो चुकी होती है। उन्होंने बताया कि घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के साथ भी ऐसी घटनाएं हुई है। ऐसे लोग घर पर अकेले होने के कारण अपने साथ हुई घटना के बारे में किसी रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति को बता भी नहीं पाते और आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं।

लोगों को समझने की जरूरत, सुरक्षा अधिकारी फोन पर नहीं डराते

​अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि साइबर क्राइम व डिजिटल अरेस्ट मामलों में लोगों व बुजुर्गों को जागरूक करने की जरूरत इसलिए है कि किसी भी सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी कभी भी मोबाइल या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को न तो डराते हैं और न ही उनकी किसी मामले में लिप्तता के बारे में कहते हैं। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक रहना चाहिए कि ऐसे किसी सुरक्षा अधिकारी के नाम से फोन या वीडियो आए तो उनके झांसे में आने के बजाय पुलिस को सूचना देनी चाहिए, जिससे वे डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं का शिकार नहीं बन सके।

अलवर शहर में एक व्यक्ति की जागरुकता से बची ठगी

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि पिछले दिनों अलवर शहर के सदर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश की। लेकिन व्यक्ति साइबर ठगों के झांसे में आने के बजाय सीधे पुलिस के पास पहुंचा और घटना के बारे में बताया। जिस पर सदर थाना एसएचओ ने मौके पर पहुंच कर व्यक्ति को साइबर ठगी से बचाया।उन्होंने बताया कि वह व्यक्ति विदेश से अपने किसी परिचित के घर पर आया था और इस दौरान साइबर ठगों ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का प्रयास किया।

महिला को डिजिटल अरेस्ट कर सवा करोड़ की ठगी की

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शरण कांबले ने बताया कि पिछले साज दिसम्बर में शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत स्कीम नंबर एक में एक बुजुर्ग महिला को साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर करीब 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और इस दौरान ठग बुजुर्ग महिला की झूठे केसों में संलिप्तता बताकर करीब सवा करोड़ रुपए की ठगी कर ली। ठग महिला को परेशान कर सात दिनों तक बार— बार राशि अपने खातों में डलवाते रहे। साइबर ठगों ने बुजुर्ग महिला को मनी लांड्रिंग केस में नाम होने की बात कहकर ठगी के जाल में फंसाया था। साइबर ठगों की ओर से बार— बार राशि मांगने पर बुजुर्ग महिला को शक हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। इस पर पुलिस ने बुजुर्ग महिला के करीब 50 लाख रुपए होल्ड करवाए।

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