Tuesday, July 21, 2026
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अलवर का मेवात बना साइबर क्राइम का हॉटस्पॉट, जिले में 27 संवेदनशील क्षेत्र चिन्हित, हर महीने दर्ज हो रहे 37 साइबर अपराध, पिछले साल की तुलना में मामलों में तेजी; पुलिस ने 78 हजार से अधिक लोगों को किया जागरूक

अलवर। अलवर जिले का मेवात क्षेत्र तेजी से साइबर अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। जिले में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस ने 27 गांवों और क्षेत्रों को साइबर क्राइम हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया है। चिंता की बात यह है कि वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही जिले में साइबर अपराध के 224 मामले दर्ज हो चुके हैं। यानी हर महीने औसतन 37 मामले सामने आए हैं, जबकि वर्ष 2025 में यह औसत करीब 23 मामले प्रतिमाह था। लगातार बढ़ते आंकड़े पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

जिले में साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस एक ओर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर आमजन को जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष अब तक जिले में 972 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 78 हजार 417 लोगों को साइबर ठगी से बचाव के तरीके बताए जा चुके हैं।

27 हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर पुलिस की विशेष नजर

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) डॉ. प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि जिले में वर्तमान में साइबर अपराध के 27 हॉटस्पॉट चिन्हित हैं। इनमें रघुनाथगढ़, खोरा करमाली, इसन का बास, ककराली, नीकच सहित कई गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में साइबर अपराधियों की गतिविधियां लगातार सामने आने के कारण पुलिस विशेष निगरानी रख रही है। ऑपरेशन साइबर संग्राम 2.0 के तहत इन इलाकों में लगातार दबिश देकर अपराधियों की धरपकड़ की जा रही है।

छह महीने में 239 साइबर ठग गिरफ्तार

डॉ. रघुवंशी ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक दर्ज 224 साइबर अपराध मामलों में पुलिस 239 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं साइबर थाने में भी इस वर्ष अब तक साइबर ठगी के 12 अलग-अलग प्रकरण दर्ज हुए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर संग्राम 2.0 के तहत साइबर नेटवर्क को तोड़ने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

मामले बढ़े, लेकिन हॉटस्पॉट की संख्या नहीं

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में भी जिले में 27 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित थे। उस दौरान साइबर अपराध के 276 मामले दर्ज हुए थे और 425 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वर्ष 2026 में हॉटस्पॉट की संख्या नहीं बढ़ी है, लेकिन अपराध की रफ्तार तेज हो गई है। छह महीने में ही 224 मामले दर्ज हो जाने से यह स्पष्ट है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो वर्ष के अंत तक साइबर अपराध पिछले वर्ष का रिकॉर्ड भी पार कर सकते हैं।

स्कूल, कॉलेज से लेकर गांवों तक जागरूकता अभियान

साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। ऑपरेशन साइबर संग्राम के तहत स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं को ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीकों से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। पुलिस लोगों को संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल, ओटीपी साझा करने और अनजान लोगों को पैसे ट्रांसफर करने से बचने की समझाइश दे रही है।

ऐसे दे रहे हैं साइबर ठगी को अंजाम

जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस वर्ष सबसे अधिक मामले फर्जी लिंक भेजकर ऑनलाइन ठगी (19), फर्जी बैंक मैसेज भेजकर पैसे ट्रांसफर करवाने (18), खातों से राशि स्थानांतरित कर हड़पने (19), सोशल मीडिया पर लग्जरी होटल की फर्जी प्रोफाइल बनाकर बुकिंग के नाम पर धोखाधड़ी (15), न्यूड वीडियो कॉल कर ब्लैकमेलिंग (15) और फोन पर लालच देकर ऑनलाइन ठगी (15) के सामने आए हैं।

इसके अलावा पुराने सिक्के और नोट महंगे दामों में बिकवाने का झांसा, ब्रांडेड कपड़ों की फर्जी बिक्री, ओएलएक्स पर सस्ते मोबाइल, कार और ड्रोन बेचने के नाम पर ठगी, नटराज पेंसिल पैकिंग वर्क और अन्य फर्जी नौकरियों का झांसा, सेना या पुलिस अधिकारी बनकर सामान बेचने के नाम पर धोखाधड़ी, पीएम किसान और आयुष्मान कार्ड केवाईसी, ट्रेडिंग व निवेश, मोबाइल का एक्सेस लेकर बैंक खाते खाली करना, सिम स्वैप फ्रॉड, यूएसडीटी निवेश, फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन गेम के जरिए ठगी जैसे कई तरीके भी सामने आए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करना और साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है।

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