Monday, October 19, 2026
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बाघ बढ़े तो अलवर में बढ़ा पर्यटन का दायरा, एक दशक में पर्यटक तीन गुना से ज्यादा

 

प्रेम पाठक

अलवर। कभी करीब दो लाख पर्यटकों तक सीमित रहने वाला अलवर अब हर साल सात लाख से ज्यादा सैलानियों की मेजबानी कर रहा है। सरिस्का में बढ़ते बाघों ने जहां वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान दी है, वहीं बेहतर रेल और सड़क कनेक्टिविटी ने देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए अलवर की दूरी कम कर दी है। पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में अलवर के पर्यटन केंद्रों पर 2.07 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 7.29 लाख हो गई। यानी दस साल में पर्यटकों की संख्या साढ़े तीन गुना से ज्यादा हो गई।

इसी अवधि में सरिस्का के बाघों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। 2015 में अलवर में 13 बाघ थे, जो 2026 में बढ़कर 56 हो गए। बाघों की बढ़ती संख्या ने सरिस्का को अलवर आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना दिया है। खासतौर पर देश के बड़े शहरों से आने वाले पर्यटकों में जंगल सफारी और बाघ दर्शन को लेकर उत्साह बढ़ा है।

कोरोना के बाद तेजी से बढ़ा पर्यटन

पर्यटन विभाग के अनुसार 2015 में अलवर जिले के पर्यटन केंद्रों पर 2,07,424 पर्यटक पहुंचे थे। 2019 में यह संख्या बढ़कर 4,90,469 हो गई। कोरोना के कारण 2020 में पर्यटकों की संख्या घटकर 2,08,204 रह गई, लेकिन इसके बाद पर्यटन ने तेजी से वापसी की।

वर्ष 2021 में 3,76,189, 2022 में 6,63,336 और 2023 में रिकॉर्ड 8,25,590 पर्यटक अलवर पहुंचे। इसके बाद 2024 में 7,25,863 और 2025 में 7,29,482 पर्यटक आए। यानी कोरोना के बाद तीन वर्षों से अलवर में पर्यटकों की संख्या लगातार सात लाख से अधिक बनी हुई है।

विदेशी पर्यटकों का आकर्षण भी बढ़ा

अलवर अब केवल देशी पर्यटकों का ही पसंदीदा ठिकाना नहीं रहा। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022 में 3,086 विदेशी पर्यटक अलवर पहुंचे थे, जो 2023 में बढ़कर 11,869, 2024 में 15,017 और 2025 में 16,339 हो गए। हालांकि 2019 में 21,321 विदेशी पर्यटक आए थे, लेकिन कोरोना के बाद विदेशी पर्यटन में भी लगातार सुधार देखने को मिला है।

रेल और एक्सप्रेसवे ने आसान किया सफर

अलवर के पर्यटन को बढ़ावा मिलने के पीछे बेहतर कनेक्टिविटी भी बड़ा कारण है। पिछले कुछ वर्षों में अलवर रेल नेटवर्क पर कई तेज और आधुनिक ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हुई हैं। वंदे भारत, शताब्दी, डबल डेकर और अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों से अलवर दिल्ली और जयपुर समेत कई बड़े शहरों से जुड़ा है।

दूसरी ओर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे ने सड़क मार्ग से अलवर की पहुंच और आसान कर दी है। दिल्ली-एनसीआर से वीकेंड पर अलवर और सरिस्का आने वाले पर्यटकों के लिए यह कनेक्टिविटी खास तौर पर फायदेमंद साबित हुई है।

झील से जंगल और किले तक पर्यटन का पूरा पैकेज

अलवर की खासियत यह है कि यहां पर्यटकों को एक ही जिले में अलग-अलग तरह के पर्यटन का अनुभव मिलता है। सरिस्का में जंगल सफारी और बाघ दर्शन, सिलीसेढ़ में झील और बोटिंग, बाला किला में इतिहास, पांडुपोल और भर्तृहरि में धार्मिक पर्यटन तथा भानगढ़-अजबगढ़ में ऐतिहासिक और रोमांचकारी पर्यटन का आकर्षण है।

इसी विविधता के कारण अलवर को केवल सरिस्का तक सीमित पर्यटन स्थल के बजाय मल्टी-डेस्टिनेशन टूरिज्म के रूप में पहचान मिल रही है।

पर्यटन बढ़ा तो स्थानीय रोजगार को भी मिला सहारा

पर्यटकों की बढ़ती संख्या का असर पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। होटल, रिसॉर्ट, टैक्सी, गाइड, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे दुकानदारों को पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का लाभ मिल रहा है। पर्यटन केंद्रों के आसपास स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

विश्व पर्यटन मानचित्र पर पहचान बनाने की तैयारी

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं अलवर सांसद भूपेंद्र यादव के अनुसार अलवर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एनसीआर के बड़े चिड़ियाघर, नगर वन, श्रीराम वाटिका समेत विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं को विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि पर्यटन का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और इसका सीधा लाभ आमजन को मिलेगा।

इस तरह सरिस्का के बढ़ते बाघ, बेहतर कनेक्टिविटी और ऐतिहासिक-धार्मिक पर्यटन स्थलों का मेल अलवर को राजस्थान के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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